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अंतराष्ट्रीय महिला दिवस, महिलाओं के प्रति व्याप्त कुरीतिओं के समाप्त करने का प्रयास करें वहीं असली ‘महिला दिवस’ सार्थक होगा


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Agra: पराग सिंहल आज 8 मार्च को अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के रुप में मनाया जाता है। लेकिन भारत की संस्कृति में महिला को हमेशा से प्रेरणा माना जाता रहा है। आपको याद होगा आदिकवि कालीदास की पत्नी कालीदास जी के लिए प्रेरणा बनी उनकी पत्नी तो वह सृष्टि के प्रथम महान कवि बन गये। ऐसे ही आचार्य गोस्वामी तुलसीदास भी अपनी पत्नी की प्रेरणा से ही राम चरित मानस जैसे ग्रन्थ की रचना कर पाये, जो आज भी जीवन में जीवन्त बनाता है, बल्कि समाज आज भी घर-घर में रामराज्य की लकीर पर चल गर्व महसूस करता है। हमारी हिन्दु संस्कृति में महिला हमेशा से जीवन की सशक्त मार्ग चुनने और चलने की प्रेरणा रही है। वैसे तो महिला चरित्र को परिभाषित करना बहुत ही कठिन है फिर भी मैं करने का प्रयास कर रहा हूं। यदि आप महिला को बहिन के रुप में देखते हैं तो वह हमेशा ही अपने पिता और भाईयों के प्रति समर्पित भाव रखते हुए मां के समान ही अपना कत्र्तव्य निभाती है। ऐसे ही मां के रुप में देखें तो मां के रुप में वह पृथ्वी माता का दायित्व निभाते हुए जीवन का निर्बहन करती है। मैंने पृथ्वी माता इसलिए कहा कि पृथ्वी को हमारी संस्कृति में मां कहा गया है। क्योंकि आप विचार करें तो पायेंगे कि मां में पृथ्वी की सहन-शीलता समान मानी गई क्योंकि मनुष्य तमाम तरह के विकास करने के लिए पृथ्वी का दोहन कर रहा है, परन्तु पृथ्वी मां समान अपने पुत्रों ;मनुष्यद्ध द्वारा किये जो रहे सभी प्रकार के दोहन को स्वीकार कर रही है परन्तु जैसे मां अपने बच्चे की हरकतों से कभी-कभी उसकी गुस्सा हो जाती है और पिटायी कर देती है वैसे ही पृथ्वी मां जब कुपित होती है तो प्राकृतिक आपदा के रुप में अपनी गुस्से को व्यक्त कर देती है और तबाही हो जाती है। मां का भी यही रुप होता है। मैं जीवन में बहुत से ऐसे वाकये देखता हूं महिलाओं के समर्पण को देखता हूं। महिला चाहे युवती हो या कन्या, बचपन से ही अपनी जिम्मेदारी निभाने में आगे रहती है। मैं एक किस्सा अने अनुभव के रुप में आप सभी पाठकों से शेयर कर रहा हूं, मैं उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद के दौरे पर था, आॅटो से जा रहा था अकेला था, रास्ते में लगभग 11 साल की बच्ची अपने छोटे भाई के साथ उस आॅटो में चढ़ी, वह छोटा बच्चा सीट पर बैठ नहीं पा रहा था क्योंकि छोटा था, जबकि वह बच्ची बैठ गई थी, सड़क खराब होने के कारण आॅटो उछाल ले रहा था लेकिन वह बच्ची अपने छोटे भाई की सुरक्षा के लिए उसको अपने से चिपका कर सुरक्षित कर रही था अैर कोशिश कर रही थी उसको कोई नुकसान न हो और वह सुरक्षित रहे। जबकि वह स्वयं उन धक्कों से संतुलन बिगड़ने से स्वयं को अतना नहीं बचा पा रही थी, वह दृष्य देखकर मन में एक ही विचार आया कि देखों, उस छोटी महिला बच्ची को, अभी से ही जिम्मेदारी का एहसास कैसे निभा रही है कि स्वयं की चिंता न कर बल्कि अपने छोटे भाई के लिए अधिक चिंचित है। यह होती है महिला। आगे विचार करते हुए हम कह सकते हैं कि महिला अबला नहीं बल्कि सबला भी है। जब युवती की शादी होती है तो वह अपने पिया के अनजान घर में अकेली ही आती है। जहां वह किसी को व्यक्तिगतरुप से नहीं जानती और न ही उनके व्यवहार और खानपान से परिचित है लेकिन फिर भी वह धीरे-धीरे परिवार में स्थान बना लेती है, और इतना अधिक स्थान बनाती है कि उसकी अर्थी उठने तक वह उस घर में एकाधिकार के साथ पूरे परिवार को चलाती है। उसकी बिना इच्छा के परिवार मंे कोई निर्णय नहीं पाते। आज हमारा समाज पुरुष प्रधान समाज है, पुरुष प्रधान देश है लेकिन मैं इस कथन से सहमत नहीं हो पाता हंू। पुरुष प्रधान तो इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि हमारी संस्कृति में स्त्री को पृथ्वी के समान माना गया है तो पुरुष को आसमान के समान, क्योंकि महिला प्रेरणा की स्रोत है तो पुरुष संरक्षक। पूरी पृथ्वी को ढक कर पूरे सृष्टि ;मांद्ध को संरक्षण दे रहा है। ऐसे बहुत से उदाहरण हैं कि जहां हमारे देश में ही नहीं बल्कि प्रत्येक देश में आज भी महिला पृथ्वी के समान सहन-शीलता का ओढ़ना ओढ़ते हुए अपने समाज, अपने देश को दिशा देने में आज भी आधुनिक युग में स्त्री प्रेरणा बनी हुई है। हां आज हमारा समाज की सोच बन गई कि जब महिलाओं की प्रत्येक काम मंे भागीदारी नहीं हो सकती। ऐसाम मानते हुए 8 मार्च को अंतराष्ट्रीय दिवस मनाते हैं कि महिला अब तक आगे नहीं बढ़ पा रही है इसलिए महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाओं बनानी चाहिए। जबकि मेरा मानना है कि महिला तो हमेशा ही आगे रही है। लेकिन सत्य को स्वीकार करने की आवश्यता है। हां, साथ ही सोच बदलने के साथ सत्य को स्वीकार करने की आवश्यकता है। आज भी इस आधूनिक युग में महिला प्रेरणा की स्रोत बनी हुई है। बहुत कुछ नहीं लिख पाया हंु लेकिन मेरे विचार से सहमत अवश्य ही होंगे। कहने को मेरे पास महिलाओं की साहसभरे और सशक्त महिलाओं के बहुत से अनुभव और आंखों देखे हैं। हां अंत में मैं मातृशक्ति को हमेशा नमन करता हूं कि समाज से अपील करता हूं कि सोच बदलते हुए सच को स्वीकार करें और महिलाओं के प्रति व्याप्त कुरीतिओं के समाप्त करने का प्रयास करें वहीं असली ‘महिला दिवस’ सार्थक होगा।-, आगरा मो. 9837997666, 9410664214 The post अंतराष्ट्रीय महिला दिवस, महिलाओं के प्रति व्याप्त कुरीतिओं के समाप्त करने का प्रयास करें वहीं असली ‘महिला दिवस’ सार्थक होगा appeared first on Welcome to Nayesamikaran.