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आरटीआई के वादों की पैरोकारी अधिवक्ता से कराता नगर निगम


Agra:
  • हर साल लाखों रुपये का भुगतान भी किया जाता
  • यह काम जन सूचना अधिकारी को करना चाहिए

नगर निगम एक ओर आर्थिक संकट का रोना रोता है, दूसरी ओर हर साल कुछ ऐसे खर्चे किए जाते हैं जो नियमानुसार वैध नहीं हैं। जन सूचना अधिकार के वादों की पैरवी नगर निगम द्वारा अधिवक्ता के माध्यम से कराई जाती है और इस मद में हर साल लाखों रुपये का भुगतान किया जाता है। यह शासन के आदेश का खुला उल्लंघन है क्योंकि जन सूचना अधिकार के वादों की पैरोकारी खुद संबंधित विभाग के जन सूचना अधिकारी को करनी चाहिए।

नगर निगम ने एक आरटीआई के जवाब में अवगत कराया है कि आगरा नगर निगम के जन सूचना अधिकार संबंधी वादों में पैरोकारी के लिए एक अधिवक्ता को वर्ष 2016-17 में 68080 रुपये और वर्ष 2019-20 में 178440 रुपये का भुगतान किया। बताया जाता है कि अधिवक्ता को यह भुगतान राज्य सूचना आयोग के समक्ष विचाराधीन वादों की पैरोकारी के लिए किया गया।

बता दें कि 18 जनवरी 2010 को उत्तर प्रदेश शासन की तत्कालीन सचिव अनीता सिंह ने शासन के समस्त प्रमुख सचिवों, सचिवों और विभागाध्यक्षों को भेजे एक पत्र में निर्देशित किया था कि राज्य सूचना आयोग में विचाराधीन वादों की पैरवी हेतु आयोग के समक्ष जन सूचना अधिकारी अथवा प्रथम अपीलीय अधिकारी को भेजा जाए। ऐसी अपेक्षा सूचना आयोग ने भी की थी। अनीता सिंह ने यह पत्र इस शिकायत के बाद भेजा था जिसमें कहा गया था कि आयोग के समक्ष पैरवी के लिए जन सूचना अधिकारी अथवा प्रथम अपीलीय अधिकारी के स्थान पर विभागों के कनिष्ठतम कर्मचारी भेजे जाते हैं जो सूचना का अधिकार अधिकार अधिनियम 2005 तथा उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग (अपील प्रक्रिया) नियमावली 2006 के प्रावधानों के अनुसार उचित नहीं है।

अनीता सिंह के पत्र से एक बात साफ है कि राज्य सूचना आयोग के समक्ष पैरवी के लिए विभाग के सूचना अधिकारी अथवा प्रथम अपीलीय अधिकारी को मौजूद रहना है। उनकी आपत्ति कनिष्ठ कर्मचारी के पेश होने को लेकर थी। इसके विपरीत आगरा नगर निगम तो कनिष्ठ कर्मचारी, जन सूचना अधिकारी या प्रथम अपीलीय अधिकारी तो दूर, अधिवक्ता को पैरवी के लिए राज्य सूचना आयोग के समक्ष भेजता है और इसके लिए हर साल लाखों रुपये का भुगतान भी कर रहा है।

यहां यह भी बता दें कि उत्तर प्रदेश शासन के ऊर्जा अनुभाग दो के अनुभाग अधिकारी ने एक आरटीआई के जवाब में अवगत कराया है कि ऊर्जा विभाग द्वारा जन सूचना अधिकार से संबंधित वादों की पैरवी के लिए किसी अधिवक्ता की तैनाती नहीं की गई है। सूचना उपलब्ध कराए जाने के लिए जन सूचना अधिकारी को नामित किया जाता है और जन सूचना अधिकारी ही राज्य सूचना आयोग के समक्ष उपस्थित होता है। इससे भी स्पष्ट है कि सूचना संबंधी वादों की पैरवी के लिए अधिवक्ता का कोई प्रावधान नहीं है।

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