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तीन दिन में मौतें तीन गुना बढ़ीं


Agra:
  • श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए करना पड़ रहा घंटों इंतजार
  • ताजगंज के विद्युत शवदाह गृह पर आज चौथी भट्टी चालू हो जाएगी

शहर के श्मसान घाटों पर सुबह से लेकर देर रात तक दाह संस्कार करने वालों की भीड़ लगी हुई है। कोरोना महामारी के दौर में लोगों की चटपट मौत हो रही है पर प्रशासनिक आंकड़ों में हर दिन एक या दो की मौत दिखाई जा रही है, जबकि श्मसान घाटों पर शवों की लगी कतार से साफ है कि कोरोना से मौतें कहीं ज्यादा हो रही हैं। हालात ये हैं कि दाह संस्कार के लिए लोगों को तीन-चार घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। उधर विद्युत शवदाह गृह पर आज चौथी भट्टी भी प्रारंभ कर दी जाएगी, ताकि लोगों को दाह संस्कार करने में परेशानियों का सामना न करना पड़े।

क्षेत्र बजाजा कमेटी के अध्यक्ष अशोक गोयल ने बताया कि अभी तीन भट्टियां काम कर रही हैं। चौथी आज संभवत: प्रारंभ हो जाएगी। उन्होंने बताया कि एक शव के संस्कार में एक घंटे का समय लग रहा है। शुक्रवार को पहुंचे 27 शवों का विद्युत शवदाह गृह पर संस्कार किया गया। इसमें तीनों भट्टियों का लगातार प्रयोग किया गया। उनका कहना है कि यह अच्छी बात है कि आगरा का विद्युत शवदाह गृह अन्य जिलों के शवदाह गृहों से बेहतर है। दूसरी जगहों पर इतनी व्यवस्थाएं नहीं हैं। वहां की सारी भट्टियां तक चालू नहीं हैं। यहां पर समाज के सहयोग से बेहतर काम हो रहा है।

इन दिनों हो रही मौतों के आंकड़ों की बात करें तो अकेले ताजगंज मोक्षधाम पर विद्युत शवदाह गृह के साथ ही लकड़ी से भी दाह संस्कार होते हैं। दोनों ही स्थलों पर पिछले तीन-चार दिनों में दाह संस्कार के लिए पहुंचने वाले शवों में यकायक इजाफा हुआ है। सामान्य दिनों में जहां विद्युत शवदाह गृह पर प्रतिदिन आठ-दस शव दाह संस्कार के लिए पहुंचते थे, वहां पिछले तीन दिन से संख्या बढ़कर 20-25 हो गई है। इसी तरह लकड़ी वाले घाट पर भी हर दिन 25 से 30 शव पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि यहां के प्लेटफार्म भरे चल रहे हैं। एक चिता की मुखाग्नि प्रक्रिया होने के बाद दूसरी चिता सजाई जा रही है। इस प्रक्रिया को पूरा करने में लोगों को तीन से चार घंटे तक बारी आने का इंतजार करना पड़ रहा है।

विद्युत शवदाह गृह पर भी यही हाल है। एक शव का संस्कार पूरा होते ही दूसरे की तैयारी प्रारंभ करा दी जाती है। कल ही अकेले 27 शवों का दाह संस्कार कराया गया है। इसके अलावा शहर में पोइया घाट, आवास विकास परिषद, बल्केश्वर, कैलाश घाट, शाहगंज मल्ल का चबूतरा आदि श्मसान घाटों पर भी दाह संस्कार किए जा रहे हैं। चूंकि यहां पर ताजगंज मोक्षधाम जैसी व्यवस्थाएं नहीं हैं और न ही यहां पर क्षेत्र बजाजा जैसी को सामाजिक संस्था सक्रिय है, इसलिए यहां के आंकड़ों के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकती है पर यह तय है कि इस समय कोरोना के साथ ही लोग इसके भय से भी मर रहे हैं। जरा सी खांसी-जुकाम, बुखार में परिवार के सदस्य को अकेले में छोड़ा जा रहा है, विशेष रूप से बुजुर्गों के साथ यह हो रही स्थिति भयावह है। इस बारे में क्षेत्र बजाजा के अध्यक्ष अशोक गोयल का कहना है कि बुजुर्गों को एकांकीपन में भेजे जाने से भी स्थिति बिगड़ रही है। फिलहाल इसमें लोगों को सहानुभूति के साथ उन पर नजर रखने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी को लेकर पैनिक होने की जरूरत नहीं है। इलाज से तमाम मरीज सही हो रहे हैं।

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