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दुर्लभ योगों के साथ दीपोत्सव कल से


Agra:

जल गया है दीप तो अंधियारा ढल कर ही रहेगा

पंच दिव्सीय दीपोउत्सव इस बार पांच दिन के स्थान पर चार दिन का होगा। छोटी दिवाली यानि रूपचौदस और धनतेरस एक ही दिन मनाई जाएगी। धनतेरस और रूप चौदस कल ही हैं। दिवाली 14 नवंबर को है। 15 नवंबर को गोवर्धन और 16 नवंबर की भैया दूज मनाई जाएगी।

शहर के प्रमुख ज्योतिर्विद पंडित राधेश्याम श्रोत्रिय का कहना है कि छोटी और बड़ी दिवाली एक साथ नहीं हो सकतीं। इसलिए छोटी दिवाली धनतेरस एक साथ होंगी। इस वर्ष 14 नवंबर को दीपावली है। आमतौर पर शनिवार की दीपावली कुछ भारी मानी जाती है लेकिन फिर भी यह सभी प्रकार से मंगलकारी ही रहेगी। इस बार नवरात्र भी शनिवार को शुरू हुए थे।

दिवाली पर ग्रहों का बड़ा खेल देखने को मिलेगा। कई वर्षों बाद यह दुर्लभ संयोग बन रहा है। दीपावली के वक्त गुरु ग्रह अपनी राशि धनु में और शनि अपनी राशि मकर में रहेंगे। शुक्र ग्रह कन्या राशि में नीच का रहेगा। इन तीन ग्रहों का यह दुर्लभ योग वर्ष 2020 से पहले सन् 1521 में 9 नवंबर को देखने को मिला था। उस बार भी इसी दिन दीपोत्सव वर्ष मनाया गया था। इसके अलावा 17 साल बाद दिवाली सर्वार्थ सिद्धि योग में सेलिब्रेट की जाएगी। इसके पहले ऐसा शुरू मुहूर्त साल 2003 में बना था।

गुरु और शनि आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाले ग्रह माने गए हैं। ऐसे में दीपावली आपके लिए कई शुभ है।

धनतेरस पर सोना खरीदना सबसे शुभ

पंडित राधेश्याम श्रोत्रिय ने बताया कि धनतेरस पर सोना खरीदना सबसे शुभ माना जाता है। हालांकि  इसके अलावा भी आप अपनी जरूरत का सामान और चांदी आदि खरीद सकते हैं। स्टील के बर्तन से ज्यादा शुभ  तांबा या पीतल के बर्तन खरीदें।

दीपावली पूजन के दौरान यह न करें

पंडित त्रिभुवन गौतम शास्त्री ने बताया कि दीपावली पूजन के दौरान शंख नहीं बजाना चाहिए। न ही ताली बजानी चाहिए। आरती भी धीमी आवाज में की जानी चाहिए। माता लक्ष्मी को शोर पसंद नहीं है। लक्ष्मी के साथ गणेश पूजन तो होता ही है। भगवान विष्णु की पूजा भी होनी चाहिए। इस तरह लक्ष्मी नारायण का पूजन सर्वश्रेष्ठ बनता है।

दिवाली पर लक्ष्मी पूजन शुभ  मुहूर्त-

प्रतिष्ठानों पर लक्ष्मी पूजन सूर्योदय के बाद पूरे दिन में कभी भी किया जा सकता है। घरों में लक्ष्मी पूजा मुहूर्त 14 नवंबर की शाम 5:28 से शाम 7:24 तक। सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 14 नवंबर की शाम 5:49 से 6:02 बजे तक। हालांकि इसके अलावा शाम के बाद रात भर  तक कभी भी पूजन अच्छा है।