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भयानक विस्फोट टल गाया


Agra:

कॉसमॉस और इसरो के वैज्ञानिक इस टकराव को टालने के लिए रातभ्र जागते रहे

अंतरिक्ष में आमने-सामने आये भारत और रूस के सैटेलाइट टकराने को थे

बंगलुरू। स्पेस में भारत का रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कार्टोसैट-2एफ बेहद खतरनाक तरीके से रूस के एक सैटेलाइट के काफी करीब पहुंच गया। हालांकि दोनों सैटेलाइट बेहद करीब से गुजर गए और अंतरिक्ष में सम्भावित टक्कर टल गई। दोनों ही उपग्रहों में भिड़ंत न हो, इसके लिए दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियां रात भर अपने-अपने सैटेलाइट की निगरानी करती रहीं। इसके साथ ही इस आकाशीय घटना पर दुनिया के दूसरे देशों की निगाहें टिकी थीं। रूस ने कहा कि दोनों ही सैटेलाइट के बीच दूरी केवल 224 मीटर रह गई थी। उधर, इसरो ने इस दूरी को 420 मीटर बताया है। रूस की स्पेस एजेंसी रास्कोमोस ने अपने सहयोगी संस्थान से मिले इनपुट के आधार पर  बताया कि 700 किग्रा वजनी कार्टोसैट 2एफ सैटेलाइट कल 01.49 यूटीसी पर खतरनाक तरीके से रूस के कानोपस-वी स्पेस्क्राफ्ट के करीब आ गया। रोस्कोस्मोस ने बताया कि संस्थान की गणना के अनुसार रूस और विदेशी सैटेलाइट के बीच की न्यूनतम दूरी 224 मीटर थी। लेकिन दोनों सैटेलाइट्स इसी दूरी से गुजर गए। हालांकि दोनों सैटेलाइट्स में यदि टक्कर होती तो इसके गंम्भीर परिणाम हो सकते थे। इसके कारण अंतरिक्ष में अन्य देशों के सैटेलाइट्स को भी नुकसान पहुंच सकता था। यदि इन सैटेलाइट्स का कोई टुकड़ा धरती पर गिरता तो उससे भारी तबाही हो सकती थी।

दोनों स्पेसक्राफ्ट पृथ्वी की रिमोट सेंसिंग के लिए डिजाइन किए गए थे। हालांकि इसरो के चेयरमैन के सिवन ने बताया कि हम चार दिनों से सैटेलाइट पर नजर रख रहे थे और यह रूसी सैटेलाइट से करीब 420 मीटर की दूरी पर था। ऐसे समय में कोई ऐक्शन तभी किया जाता है, जब यह करीब 150 मीटर की दूरी पर आ जाए। सिवन ने आगे यह भी कहा कि जब उपग्रह पृथ्वी की समान कक्षाओं में होते हैं, तो ये चीजें असामान्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में परंपरा यह है कि दो एजेंसियों आपस में संवाद करती हैं और आगे का फैसला करती हैं। उन्होंने आगे बताया कि हाल ही में ऐसी ही स्थिति स्पेन के सैटेलाइट के साथ हुई थी और इसका समाधान किया गया। इन चीजों को आमतौर पर सार्वजनिक नहीं किया जाता है। कार्टोसैट-2एफ को 12 जनवरी, 2018 को श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया था और यह अब भी आपरेशनल है। इंटरनेट इमेज