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यह कम्युनिटी स्प्रेड नहीं तो और क्या है ?


Agra:
  • शहर की हर गली, मोहल्ले, कालोनी से निकल रहे कोरोना संक्रमित मरीज
  • अस्पतालों में बेड नहीं, ऑक्सीजन नहीं, इंजेक्शन नही
  • अस्पतालों से कई गुना घर पर करा रहे इलाज
  • चिता जलाने के लिए भी करना पड़ रहा इंतजार

हर ओर हाहाकार है। शहर के हर गली, मोहल्ले, पॉश कालोनी से संक्रमित मरीज मिल रहे हैं। श्मशान में चिता जलाने के लिए जगह नहीं मिल रही। लोग घंटों इंतजार कर रहे हैं। अस्पताल में मरीजों को बेड नहीं मिल रहे। अस्पतालों को आक्सीजन नहीं मिल रही। जिन लोगों को बेड मिल गया है उन्हें रेमेडिसवीर इंजेक्शन नहीं मिल रहा। जांच कराने वालों की संख्या इतनी अधिक है कि उन्हें तीन-चार दिन तक जांच रिपोर्ट नहीं मिल रही। अस्पताल तथा प्राइवेट नर्सिंग होम में जितने मरीज भर्ती हैं, उससे कई गुना घरों पर आइसोलेशन में रहकर इलाज करा रहे हैं। यह कम्युनिटी स्प्रेड नहीं तो और क्या है?

विशेषज्ञों के अनुसार पहली स्टेज में संक्रमण बाहर से आने वाले कैरियर से फैलता है, जैसा पिछले साल हुआ, जब विदेश से आने वाले संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोग कोरोना संक्रमण के शिकार हुए। दूसरी स्टेज में लोकल ट्रांसमिशन होता है। जैसे सब्जी वाले से फल वाले से, नौकरानी से या लोकल किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से। तीसरी स्टेज में चिकित्सा वैज्ञानिक पता नहीं कर पाते कि संक्रमण का सोर्स क्या है, पर संक्रमण तेजी से फैलता है। लगता है मानो हवा में संक्रमण तैर रहा हो। इस स्टेज से अपना शहर तथा प्रदेश गुजर रहे हैं। अगर समय रहते इस पर काबू नहीं पाया गया तो चौथी स्टेज में पहुंचने में समय नहीं लगेगा। चौथी स्टेज में महामारी अनियंत्रित हो जाती है जैसा अभी तक सिर्फ चीन में हुआ है।  

कुछ डरावने सवाल हैं जिनका जवाब किसी के पास नहीं है। हम नहीं जानते संसार में 700 मिलियन वैक्सीन की डोज दिए जाने के बावजूद संक्रमण की गति धीमी क्यों नहीं हो रही ? हम नहीं जानते कि वैक्सीन लगवा चुके लोग दोबारा संक्रमण के शिकार क्यों हो रहे हैं ? हम नहीं जानते कि वैक्सीन लगवाने के बाद हमारे शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी कब तक हमारी रक्षा करेगी? हम नहीं जानते कि कोरोना वायरस का नया म्यूटेशन क्या होगा ? क्या वह वैक्सीन के कवच को तोड़ देगा ? हम नहीं जानते कि कौन सी वैक्सीन सबसे अच्छी है ? हम नहीं जानते कि यह महामारी कब समाप्त होगी ? चिकित्सक हैरान हैं कि जिस मरीज की जांच करा रहे हैं वह पॉजिटिव आ रहा है। खांसी, बुखार के लक्षण वाले 90 प्रतिशत मरीज जांच कराने पर कोरोना पॉजिटिव निकल रहे हैं। क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. रनवीर त्यागी के अनुसार बचाव ही एक मात्र उपाय है। लोगों को बाहर निकलने पर डबल मास्क लगाना चाहिए। भीड़ भरे स्थानों पर जाने से बचें। बाहर से लाने वाले सामान को विसंक्रमित करें। साबुन से हाथ धोएं। किसी भी चीज को छूने के बाद हाथों को सेनेटाइज करें। हाथ को मुंह, नाक अथवा आंख पर न लगाएं। 

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